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Friday, 8 November 2019

कल्पतरू - prakash sah


कल्पतरू (KALPTARU) - Prakash sah - UNPREDICTABLE ANGRY BOY - www.prkshsah2011.blogspot.in


‘मेरा जन्म हुआ है’
इसका आभास हुआ जब...
एक स्वप्न देखा मैंने
सुखी गृहस्थ बसाने का।


रोजमर्रा का साक्ष्य
वही बदरंग कंक्रीट दृश्य
जहाँ घर ‘कल्पतरू’ के
छाँव में ना था
वहाँ खुशहाली कैसी आएगी?
जब दुःख के घड़ी में
इसे हरने वाली
हरियाली ना होगी।

निश्चल मन,
शुद्ध विचार,
प्रेम भाव,
या जग से परे कुछ कल्पित भाव
की इच्छा पूर्ती करने वाला
एक वृक्ष ही है
एक ‘कल्पतरू’ ही है।

                 जन्म, प्रकृति के लिए हुआ है
और प्रकृति से ही मेरा अस्तित्व है।
हरा रंग हरियाली का
सुखी गृहस्थ का मंत्र है।

‘मेरा जन्म हुआ है’
इसका आभास हुआ जब...
एक स्वप्न देखा मैंने
सुखी गृहस्थ बसाने का।
           ©prakashsah


***


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Saturday, 2 November 2019

"सेवा का श्रृंगार देख" : छठ व्रतियों के सहायता के लिए एक कार्यक्रम - prakash sah



आप सभी को छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ


इस वर्ष छठ पूजा के लिए मैंने दो दिन तक श्रमदान करके इस महापर्व में सहयोग किया है। यह पूर्ण रूप से सेवाभाव का कार्यक्रम था। वाकई  यह अनुभव बहुत सुन्दर था।

इस कार्यक्रम में फलों व छठ पूजा सामग्रियों को लोगों के लिए सस्ते मूल्य में उपलब्ध कराना था। इसका मुख्य उद्देश्य था कि बाजार मूल्य को नियंत्रित किया जाए जिससे कि लोगों को फल सस्ते मूल्य पर उपलब्ध हो। " Selling AT NO PROFIT, NO LOSS"
अक्सर त्योहारों में फल व्यापारियों द्वारा फलों को अनुचित मूल्य पर बेचा जाता है। इस महंगाई के कारण छठ व्रतियों को इस महापर्व को करने में कठिनाईयाँ आती हैं। और देखा भी गया है कि इस कार्यक्रम के वजह से फलों का बाजार मूल्य नियंत्रित रहता है।

यह कार्यक्रम पिछले पाँच वर्ष से 'हिन्दु हाई स्कूल, हजारीबाग' में आयोजित होता आ रहा है। मैं पिछले वर्ष से इसमें योगदान दे रहा हूँ परंतु इस वर्ष पूर्ण रूप से समर्पित था।

इस सेवाभाव के कार्यक्रम के उपरांत जिन अनुभवों को मैंने कमाया है उसको एक छोटी-सी रचना में प्रस्तुत कर रहा हूँ...

सेवा का श्रृंगार देख (SEVA KA SHRINGAR DEKH) - Prakash sah - UNPREDICTABLE ANGRY BOY www.prkshsah2011.blogspot.in

।। सेवा का श्रृंगार देख ।।

                                            -प्रकाश साह

सेवा का श्रृंगार देख

मेहनत का भार लेकर
मुख पे एक मुस्कान देख

सेवा का श्रृंगार देख

चैन की नींद लेकर
नये सवेर का आरंभ देख

सेवा का श्रृंगार देख

मुश्किलों में स्वयं को
जन-जन के पास देख

सेवा का श्रृंगार देख

अचानक अपने जीवन को
लक्ष्य में बदलते देख

सेवा का श्रृंगार देख

मेहनत का भार लेकर
मुख पे एक मुस्कान देख...

©prakashsah


***

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Sunday, 27 October 2019

कहानी दिल की... -prakash sah

सुनिए इस कविता को मेरी आवाज़ में...👇👇



कहानी दिल की (kahani dil ki) - Prakash sah - UNPREDICTABLE ANGRY BOY -  www.prkshsah2011.blogspot.in



कहानी दिल की कहाँ से शुरू करूँ
शुरू होने से पहले ही खत्म हो गयी


ख्वाबों का दरिया था मैं
पर एक ख्वाब भी मेरा सच्च ना हुआ


वो इंतजार वाली घड़ी मेरे पास ही है
पता चला है, वो कहीं आसपास ही है


उड़ते अफवाहों को कितना सच्च मानूँ
मैं उसके दिल में था, ये कैसे जानूँ?


खैर अब तो ये सब, दूर की बात है
वो किसी दूसरे शहर में, किसी दूसरे के साथ है 


किसी सफर में जब भी अकेला रहता हूँ 
उसी को सोचकर कुछ लिखता रहता हूँ 


कारण का बस इतना ही कहानी है 
वो मेरे दिल में है, यही मेरी नदानी है 


यही मेरी कहानी है, यही मेरी कहानी है... 
- ©prakashSah




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Saturday, 19 October 2019

पहचान कौन ??? (Pehchaan Kaun???)

सरकारी दफ्तर में एक साधारण व्यक्ति और अधिकारी के बीच का संवाद एवं सरकारी दफ्तरों के दृश्य जहाँ आप इस नए भारत में महात्मा गाँधी और उनके विचारों को नए रूप में पाएँगे।
क्या आप हमारे नए 'गाँधी' को जानते हैं?
शायद इस सवाल का जवाब आप मेरे इस रचना में ढूँढ लें...

पहचान कौन ?


पहचान कौन (PEHCHAAN KAUN) - Prakash sah - UNPREDICTABLE ANGRY BOY www.prkshsah2011.blogspot.in


नष्ट-भ्रष्ट ईमान से,

सुस्ती इनकी पहचान है।

मीठे इनके बोल सुनो,

कार्य इनके अधूरे हैं।

इनके गोल-गोल बातों में घूमो

इन्हें ‘गाँधी’ की खोज है।


अगर आप इस खोज में

सहायता का हाथ बढ़ाओ,

फिर आप इनकी तत्परता देखो,

कार्यकुशलता इनकी देखो,

झटपट आपके सारे काम हुयें,

चिंतामुक्त अब आप  हुयें।


अरे, क्या हुआ!!!

बस.....आपके थोड़े ‘गाँधी’ ही तो गए हैं,

कोई बात नहीं......फिर आ जाएँगे।

आप भी कुछ ‘गाँधी’ दूसरों से ले लीजिए,

यही तो ‘नये भारत’ का ‘न्यू इकोसिस्टम’ है।

-prakash sah (©ps)


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