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Wednesday, 12 May 2021

का भरोसा बा तोहार | भोजपुरी कविता | कोरोना, शहर और मेरी मोहब्बत | - PRAKASH SAH

यह भोजपुरी कविता इस कोरोना महामारी में एक बड़े भाई का छोटे भाई के प्रति प्रेम, चिंता, ख्याल, एवं पुत्र जैसा व्यवहार का एक संवाद है। जो अपने छोटे भाई को बड़े ही दुलार से कुछ बाते समझा रहा है।

मान लीजिए आपके घर में एक छोटा भाई है जो बहुत चंचल है जिसे बहुत लाड-प्यार में पाला गया है। वह शरीर से बड़ा तो हो चुका है पर अब भी आप उसे एक छोटे बच्चे जैसा ही देखभाल करते हैं और वह भी उस दुलार के वज़ह से उस दायरे से कभी नहीं निकला है। 

सच है कोई भी उस दायरे से नहीं निकलेगा जिसे इतना मान-दुलार दिया जाये।

फिर अगर यही छोटा भाई अपने बड़े भाई के छत्रछाया से दूर होकर आगे की पढ़ाई करने हेतु दूसरे शहर अकेले पढ़ने-रहने के लिए जाता है जो पूरी पढ़ाई होने तक वहीं रहेगा। 

वहाँ रहते हुए अभी कुछ ही महीनें गुजरे थें कि तब ही हमारे देश में कोरोना महामारी की वज़ह से आपातकालीन परिस्थिति उत्पन्न हो जाती है और वह छोटा भाई उसी शहर में अकेला फँस जाता है।

वह सदैव ही सुख सुविधाओं में ही पला-बढ़ा है...और उसका बहुत ख्याल रखने के लिए हमेशा उसका बड़ा भाई रहा है जो हर मुश्किल वक्त में उसको अपने छत्रछाया में रखा है...पर अब इस कोरोना महामारी के भयावह परिस्थिति में वह अपने छोटे भाई के साथ नहीं है। वह जानता है कि उसका छोटा भाई समझदार तो है पर चंचल भी है, नादान भी है और ऐसी आपातकालीन परिस्थिति का उसके पास कुछ भी अनुभव नहीं है।

इस परिस्थिति से उस बड़े भाई को कितनी बेचैनी और चिंता हो रही है (उस दुलारे छोटे भाई के लिए)...इन्हीं बातों को मैंने अपनी भोजपुरी बोली के शब्दों के माध्यम से यहाँ नीचे बताना चाहा है... 


UNPREDICTABLE ANGRY BOY - www.prkshsah2011.blogspot.in

[1]

का भरोसा बा तोहार

तू   रख  बऽ   आपन   खयाल

अबहीं   के   समय  बा  बेकार

तू  रखीऽ  दू  हाथ  के  जहान

बाहर  घूमऽ  ता   एगो  बीमार

सरकार  के   देहल  बा  बयान

जान  तानी  तू   बाड़ऽ  सयान

तऽ  तू  मान जइ-बऽ  ई गुहार

लेकिन  का  भरोसा  बा तोहार

तू   रख   बऽ   आपन  खयाल

 

[2]

का भरोसा बा तोहार

तू    रख  बऽ  आपन   खयाल

घूमे  के   मत   रखीऽ   बहार

दूसरा   लहर  में   बा   बवाल

खूब   होता    अबहीं    बुखार

देह  ताप   के   र खीऽ  ध्यान

वैक्सीन   के    बा    हाहाकार

अब  18+  में   भईल  बहाल

लेकिन का  भरोसा  बा  तोहार

तू   रख  बऽ   आपन   खयाल

 

[3] 

का भरोसा बा तोहार

तू   रख  बऽ   आपन    खयाल

हिम्मत  से   जीत  होई  साकार

अबहीं  तलवार के  बनऽ मयान

बीतल  दिन  फेर  आयी  तोहार

बेफालतू कौनो मत दिहऽ बयान

ई डॉक्टर  करिहन  सब साकार

हाँ ई गुजरी समय, करऽ इंतज़ार

लेकिन  का  भरोसा  बा  तोहार

तू   रख   बऽ   आपन   खयाल


[4]

का भरोसा बा तोहार

तू   रख   बऽ   आपन   खयाल

सीख  लऽ  अब  करे  के नकार

बिना काम के  मत जईह दुकान

देखऽ  माँ-बाबुजी  के बा  दुलार

सपना  तोहार  ना  होई  नाकाम

इहाँ  घर-बार,  सब  बा गुलज़ार

तू बुलई बऽ त आ जाएम बिहान

लेकिन  का   भरोसा  बा  तोहार

तू    रख   बऽ   आपन   खयाल

-प्रकाश साह

260421


 मेरी कुछ अन्य रचनाएँ....


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🙏🙏 धन्यवाद!! 🙏🙏

BG P.C. : YourQuote
P. Editing : www.prkshsah2011.blogspot.in

Saturday, 24 April 2021

बुरा नहीं हूँ मैं - Prakash Sah | Pooja Pandey

मैं आप सभी को बता दूँ इस रचना के आरंभ की चार पंक्तियाँ POOJA PANDEY JI द्वारा लिखी हुई है। मैंने जब इन चार पंक्तियों को पढ़ा तो स्तब्ध रह गया। मैं भी खुद को रोक ना पाया और इसके बाद की चार पंक्तियां मैंने लिख कर Pooja Ji को भेजा। उन्होंने मेरी पंक्तियों की सराहना की।

Pooja Pandey जी की लिखी वो चार पंक्तियाँ...

"......

बुरा नहीं हूँ मैं

मेरी भी कुछ कहानी है

टूट चुका हूँ मैं

अपनों की मेहरबानी है

                ........"


फिर मैंने उनको सलाह दिया कि आप इसके आगे और लिखिए क्योंकि आपने आरंभ बहुत अच्छा किया है........और साथ में मैंने यह भी कहा कि शुरू की पंक्तियां अगर मेरी होती तो फिर मैं इसके आगे की कुछ और पंक्तियाँ भी जरूर लिखता।

ज़वाब में उन्होंने मुझे कहा कि "आप लिखिए...मुझे कोई परेशानी नहीं होगी अगर आप लिखोगे तो।" अब उन्होंने मुझे #इजाजत दे दी।

मैंने इन शुरू के चार पंक्तियाों को थोड़ा अपना मानकर लिखना शुरू कर दिया। यह POOJA ji की ही मेहरबानी है जो मैं नीचे लिखे हुये पंक्तियों को लिखने में सफल रहा।

उनका बहुत-बहुत धन्यवाद, जो उन्होंने मुझे अपनी पंक्तियों से लिखने की #प्रेरणा दीं। बहुत-बहुत आभार।

_______________


●○●○●

मैंने उनसे एक और इज़ाज़त माँगी  कि आप मुझे  इसे मेरे BLOG पर छापने की इज़ाज़त दीजिए। उन्हाेंने मुझे बहुत ही सहजता से इसकी इज़ाज़त दे दीं। साथ में उन्होंने यह भी कहा कि यह रचना आपने रचा है और इतनी बेहतरीन रचना के लिए आप ही सराहना के हकदार हैं।......पर मेरा मानना है कि वो भी बराबर की सराहना की हकदार हैं।

तो आज उनकी इज़ाज़त से मैं आपसब को पूरी रचना पढ़ने का अवसर दे रहा हूँ। चलिए अब पढ़ते है इस रचना को....

UNPREDICTABLE ANGRY BOY - www.prkshsah2011.blogspot.in

        ...

बुरा नहीं हूँ मैं

मेरी भी कुछ कहानी है

टूट चुका हूँ मैं

अपनों की मेहरबानी है


रोया नहीं हूँ मैं

मेरी कुछ यादें पुरानी है 

भूल चुका हूँ मैं

बस वो रिश्तें गँवानी है


झूका नहीं हूँ मैं

मेरी भी कुछ मज़बूरी है

भटक चुका हूँ मैं

ये ज़िंदगी भी ज़रूरी है


अंजाना नहीं हूँ मैं

मेरी कुछ बातें संजीवनी है

आज़मा चुका हूँ मैं

उन में क्या-क्या बिमारी है 

        -प्रकाश साह | पूजा पाण्डेय

                 240421


 मेरी कुछ अन्य रचनाएँ....




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