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Monday, 11 September 2017

मेरा देश कहता है कुछ (Mera desh Kehta Hai Kuchh; country) -ps

।। मेरा देश कहता है कुछ ।।


मेरा देश कहता है कुछ
कदम-कदम पे विविधता जिता है मेरा देश।
घूम न सका पूरा देश तो क्या हुआ,
किसी और के यादों से घूमता हूँ सारा देश।

जब खुला आकाश रहता हूँ,
किस रंग में हूँ मैं,
ये भी ना पहचान सकूँ मैं।
जब-जब मैं भंग हुआ,
तेरा रंग हरा, मेरा रंग केसरिया
हर पल ढूँढ़ता रहता हूँ मैं।

“हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई

Friday, 14 April 2017

ईश्वर-ईश्वर (THE GOD) -PS

GOD IS EVERYWHERE JUST NEED TO BELIEVE !
।। ईश्वर-ईश्वर ।।
जग में हरदम सोया,
पग-पग में कुछ तू खोया।
जग को नापा, पग से तू,
ईश्वर कण-कण में और अब भी पग में तू।

रोम-रोम से जाग उठ
मुझमें ईश्वर, तुममें ईश्वर
सब में हैं ईश्वर-ईश्वर
इस सच्च को मान ले तू।

Monday, 5 December 2016

पूर्वांचल (Purvanchal) - P.S.

।। पूर्वांचल ।।

जिसने पूर्वांचल की गोद मे खेला,
पग-पग मे देखा आस्था का मेला ।

जिसने खाई इस मिट्टी कीसौगंध,
पल-पल महसूस की इसकी सुगंध ।

जिन आत्माओं में जगी धर्मत्व की ज्ञान,
जन-जन ने माना उन महात्माओं को अपनी शान ।

आत्मज्ञान का हुआ बोध,
इस भूमी पे अवतरीत हुए, ‘महात्मा बुध्द’ ।