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Friday, 19 March 2021

तेरा जाना तेरा ऑक्टाेपस हाेना बताएगा - prakash sah

Tera jana tera Octopus hona batayega - prakash sah - www.prkshsah2011.blogspot.in



              जब तू मजबूत हाेगा

              किसी का ख्याल रखेगा।

              हर बार तू ताबूत हाेगा

              जब तू ऐसा वादा रखेगा।



              तेरी मजबूरियाँ कितनी मतलबी हाेंगी

              तेरा वक्त पे बेवक्त हाेना बताएगा।

              तेरी एक बात की कई बहानें अजनबी हाेंगे

              तेरा जाना तेरा ऑक्टाेपस हाेना बताएगा।

-Prakash Sah


  आपकाे यह रचना कैसी लगी नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बतायें। और अगर आपके पास कुछ सुझाव है तो उसे भी मेरे साथ जरूर साझा करें।     

🙏🙏 धन्यवाद!! 🙏🙏

Monday, 1 March 2021

अशुद्ध मन - prakash sah

 

अशुद्ध मन में पूजा तेरी,

लक्ष्य काे भेदा नहीं।

"अशुद्ध हुआ तेरा मन"

तुमने इसे जाना कैसे?

'शुद्धता' क्या अभी शेष है!

या, फिर यह भी तुम्हारा

काेई नया भेष है!

क्याेंकि बेवज़ह कुछ भी हाेता नहीं...

-Prakash Sah


  नीचे कमेंट बॉक्स में मुझे लिखकर जरूर बतायें कि यह रचना आपको कैसी लगी। अगर आपका कुछ सुझाव हो तो उसे भी मेरे साथ साझा करें।     

🙏🙏 धन्यवाद!! 🙏🙏

Monday, 23 December 2019

नहीं नहीं मैं कानून हुआ !!!............prakash sah

नहीं नहीं मैं कानून हुआ ( Nahi Nahi Main Kanoon Hua ) - prakash sah - Unpredictable Angry Boy -  www.prkshsah2011.blogspot.com

नहीं नहीं मैं कानून हुआ !!!
          सुनिए इसे मेरी आवाज़ में..... 👇👇


मत मत के मतदान से
मैदान में आया नया मेहमान
हाँ हाँ करके टोपीधारी
करा न्यायालय का पोथी भारी

नहीं नहीं मैं कानून  हुआ
तोड़ मरोड़ कर पेश हुआ
नेताओं के साज़िश में
कर ना पाया कभी भला

भय भय में भयावह
हवा बही है चारो ओर
इसको तोड़ो इसको फोड़ो
आग लगी है चारो ओर

चल चला चल हल्लाबोल
कोई करे अगर रोक टोक
संविधान है खतरे में
ये तू ज़ोर-ज़ोर से बोल-बोल
          -प्रकाश साह


Nahi Nahi Mai Kanoon Hua1 - Prakash Sah - UAB - www.prkshsah2011.blogspot.com  Nahi Nahi Mai Kanoon Hua2 - Prakash Sah - UAB - www.prkshsah2011.blogspot.com

Nahi Nahi Mai Kanoon Hua3 - Prakash Sah - UAB - www.prkshsah2011.blogspot.com  Nahi Nahi Mai Kanoon Hua4 - Prakash Sah - UAB - www.prkshsah2011.blogspot.com


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Monday, 2 December 2019

स्थिति में कोई बदलाव नहीं.............-prakash sah


हमारे समाज में प्रत्येक दिन कई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएँ घटती है पर इनमें से कुछ घटनानाएँ देश को बिल्कुल झकझोर देती है। इसका उदाहरण हमें बिते वर्षों में कई बार देखनों को मिला है।

2012 के निर्भया कांड से देश का कौन-सा व्यक्ति प्रभावित नहीं हुआ होगा। सबने अपने आक्रोश का प्रदर्शन किया था। हमारे शहरों की सड़कें इसकी साक्षी हैं।
पर इस 27 नबम्बर की घटना से मुझे पक्का विश्वास हो गया कि 2012 से लेकर आज तक की स्थिति में ज़रा सा भी बदलाव नहीं आया है...अंतर बिल्कुल शून्य है.......स्थिति जस की तस है।

इन सभी घटनाओं के बाद की स्थिति को देखकर मुझे इतना ही समझ आया है कि हम जितना जल्दी स्वयं को धधका लेते हैं उतना ही जल्दी स्वयं को बुझा भी लेते हैं....जैसे कुछ हुआ ही ना हो.........और फिर हम किसी दूसरी खबर की ओर बढ़ जाते हैं।

स्थिति में कोई बदलाव नहीं - STHITI MEIN KOI BADLAO NAHI - Prakash sah - UNPREDICTABLE ANGRY BOY -  www.prkshsah2011.blogspot.in

मैं माफी के साथ एक बात कहना चाहूँगा कि हम जितना किसी एक घटना पर आक्रोशित होते हैं उतना ही कोई और या ऐसी ही प्रत्येक घटना पर आक्रोशित नहीं होते हैं। गिने-चुने घटनाओं पर ही हम अपने गुस्से का प्रदर्शन करते हैं। इसका सीधा - साधा एक ही अर्थ निकलता है हमे भेड़ चाल चलने की आदत हो गई है।
              अक्सर देखने को मिलता है कि कुछ लोग बिल्कुल चुपचाप बैठे रहते हैं चाहे घटना कितनी भी बुरी क्यों ना हो। लेकिन यही लोग जैसे ही देखते हैं कि भीड़ बढ़ चुकी है तब अपनी प्रतिक्रिया व राय देते हैं......या फिर किसी कारणवश अगर भीड़ नहीं बढ़ी तब सब चुपचाप ही बैठे रह जाते हैं....जैसे वो घटना घटी ही नहीं है।

हमें अपनी सोच बदलनी होगी....हमें प्रत्येक घटना पर अपनी जोरदार प्रतिक्रिया देनी होगी चाहे वो घटना छोटी हो या बड़ी....चाहे छोटे कस्बे की हो या किसी रिहायशी इलाके की.....चाहे किसी छोटे शहर की हो या किसी मेट्रोपोलिटन शहर की। भीड़ को देखकर अपना विचार तय नहीं करना होगा।
जिस दिन प्रत्येक लोग अपने बुद्धि, विवेक और संस्कार से तय करने लगेंगे कि यह घटना हमारे समाज के सोच से बिल्कुल विपरीत एवं संक्रमित है तब...जो 2012 से लेकर अभी तक के स्थिति में अंतर शुन्य है....उसमें कुछ बदलाव देखने को मिले।
और आज मैं भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि इस बार बदलाव आने तक हमसब स्वयं को बुझने नहीं देंगे।

स्त्रियों के साथ दुर्व्यवहार पर एक ऐसी ही घटना 2017 में टेलीविज़न न्यूज़ के माध्यम से देखने को मिला था। 2017 के नव वर्ष के जश्न पर दिल्ली और बेंगलुरू में कुछ युवायों ने स्त्रियों के साथ दुर्व्यवहार किया था। यह घटना भी बिल्कुल दुर्भाग्यपूर्ण व असहनीय था.....एवं अक्षम्य था।
इस घटना को मैंने अपनी एक रचना में व्यक्त किया था......मैं चाहूँगा आप एक बार जरूर पढें।
शायद आपलोग को पता चले हम कितना स्थिर हैं।



....
आधुनिकता के नाम पर तर्क रखने वालों
तेरी छोटी बुद्धि का तर्क ‘कुतर्क’ है।
तू अपनी हरकतें संभाल ले 
या फिर अपनी बरकतें गँवा दे।
तेरी पीढ़ी के साथ हम भी उगे हैं...
हम चौक-चौराहों पे मोमबत्ती नहीं,
मन में सम्मान की लौ जला कर चले हैं

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Tuesday, 26 November 2019

फ़क़ीर हूँ (Fakir hunh)........-prakash sah


फ़क़ीर हूँ - FAKIR HUNH - Prakash sah - UNPREDICTABLE ANGRY BOY -  www.prkshsah2011.blogspot.in


  
मेरे लिए...
   आरंभ क्या! अंत क्या!
   अंत ही आरंभ है,
   आरंभ का ही अंत है।
   मैं ही आरंभ करूँ, मैं ही अंत करूँ।
   एकल सत्य है – मैं एक ‘फ़क़ीर’ हूँ।
मेरे लिए...
        सब ‘शून्य’ है।
हाँ मैं...
     शून्य हूँ...!!        फ़कीर हूँ...!!
     फ़कीर हूँ...!!     फ़क़ीर हूँ...!!

                    __--***--__


मेरे लिए...
   जन्म क्या! मृत्यु क्या!
   जन्म ही परमात्मा हैं,
   मृत्यु ही परमात्मा हैं।
   मैं लिन हूँ, मैं विलिन हूँ।
   एकल सत्य है – मैं एक ‘फ़क़ीर’ हूँ।
मेरे लिए...
         सब ‘अक्षुण्ण’ है।
हाँ मैं...
     अक्षुण्ण हूँ...!!    फ़क़ीर हूँ...!!
     फ़क़ीर हूँ...!!     फ़क़ीर हूँ...!!

                    __--***--__


मेरे लिए...
   उजाला क्या! अंधेरा क्या!
   दीये का ही जला हूँ,
   दीये के ही तले हूँ।
   मैं ही अकेला हूँ, मैं ही बाती हूँ।
   एकल सत्य है – मैं एक ‘फ़क़ीर’ हूँ।
मेरे लिए...
         सब ‘पूर्ण’ है।
हाँ मैं...
     पूर्ण हूँ...!!         फ़क़ीर हूँ...!!
     फ़क़ीर हूँ...!!     फ़क़ीर हूँ...!!

                    __--***--__


मेरे लिए...
   अपना क्या! पराया क्या!
   दुनिया ही अपना है,
   पराया कोई जन नहीँ।
   मैं ही पास दिखूं, मैं ही दूर दिखूं।
   एकल सत्य है – मैं एक ‘फ़क़ीर’ हूँ।
मेरे लिए...
         सब ‘एकात्म’ है।
हाँ मैं...
     एकात्म हूँ...!!     फ़क़ीर हूँ...!!
     फ़क़ीर हूँ...!!     फ़क़ीर हूँ...!!

                    __--***--__


मेरे लिए...
   कम क्या! ज्यादा क्या!
   कम ही ज्यादा है,
   ज्यादा से ही दूरी है।
   मैं अर्पित हूँ, मैं समर्पित हूँ।
   एकल सत्य है – मैं एक 'फ़क़ीर' हूँ।
मेरे लिए...
         सब ‘क्षणिक’ है।
हाँ मैं...
     क्षणिक हूँ...!!     फ़क़ीर हूँ...!!
     फ़क़ीर हूँ...!!     फ़क़ीर हूँ...!!

                    __--***--__


मेरे लिए...
   अमीरी क्या! गरीबी क्या!
   स्वयं ही गरीबी ओढ़ी,
   स्वयं ही अमीरी छोड़ी।
   मैं ही कारण हूँ, मैं ही साधारण हूँ।
   एकल सत्य है – मैं एक ‘फ़क़ीर’ हूँ।
मेरे लिए...
                                      सब ‘विचार’ है।
हाँ मैं...
     विचार हूँ....!!     फ़क़ीर हूँ...!!
                                  फ़क़ीर हूँ...!!     फ़क़ीर हूँ...!!

                    __--***--__


मेरे लिए...
   घर क्या! वन क्या!
   वन में ही जीवन है,
   स्वयं के ही खोज में।
   मैं ही भ्रमण करूँ, मैं ही भजन करूँ।
   एकल सत्य है – मैं एक ‘फ़क़ीर’ हूँ।
मेरे लिए...
         सब ‘अनिश्चित’ है।
हाँ मैं...
     अनिश्चित हूँ...!!  फ़क़ीर हूँ...!!
     फ़क़ीर हूँ...!!     फ़क़ीर हूँ...!!

                    __--***--__


मेरे लिए...
   न्याय क्या! नियम क्या!
   स्वभाव ही नियम है,
   बदलाव ही न्याय है।
   मैं ही आकार लूँ. मैं ही स्वीकार लूँ
   एकल सत्य है – मैं एक ‘फ़क़ीर’ हूँ।
मेरे लिए...
         सब ‘प्रकृति’ है।
हाँ मैं...
     प्रकृति हूँ....!!     फ़क़ीर हूँ...!!
     फ़क़ीर हूँ...!!     फ़क़ीर हूँ...!!

                    __--***--__


मेरे लिए...
   वचन क्या! प्रवचन क्या!
   सिध्दांत ही वचन है,
   प्रवचन में ही व्यक्तित्व है।
   मैं ही तरंग हूँ, मैं ही बेरंग हूँ।
   एकल सत्य है – मैं एक ‘फ़क़ीर’ हूँ
मेरे लिए...
         सब ‘प्रत्यक्ष’ है।
हाँ मैं...
     प्रत्यक्ष हूँ...!!      फ़क़ीर हूँ...!!
     फ़क़ीर हूँ...!!     फ़क़ीर हूँ...!!

                    __--***--__


मेरे लिए...
                                         धूप क्या! छाँव क्या!
   धूप ही कर्म है,
   छाँव ही कर्म का फल है।
   मैं ही सूत्र हूँ, मैं ही उन्मुक्त हूँ।
   एकल सत्य है – मैं एक ‘फ़क़ीर’ हूँ।
मेरे लिए...
         सब ‘आशीष’ है।
हाँ मैं...
     आशीष हूँ...!!    फ़क़ीर हूँ...!!
     फ़क़ीर हूँ...!!     फ़क़ीर हूँ...!!
                                                                         ©prakashsah



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