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Monday, 1 March 2021

अशुद्ध मन - prakash sah

 

अशुद्ध मन में पूजा तेरी,

लक्ष्य काे भेदा नहीं।

"अशुद्ध हुआ तेरा मन"

तुमने इसे जाना कैसे?

'शुद्धता' क्या अभी शेष है!

या, फिर यह भी तुम्हारा

काेई नया भेष है!

क्याेंकि बेवज़ह कुछ भी हाेता नहीं...

-Prakash Sah


  नीचे कमेंट बॉक्स में मुझे लिखकर जरूर बतायें कि यह रचना आपको कैसी लगी। अगर आपका कुछ सुझाव हो तो उसे भी मेरे साथ साझा करें।     

🙏🙏 धन्यवाद!! 🙏🙏

Friday, 15 September 2017

जिंदगी एक सफर है सुहाना (Zindagi ek safar hai suhana; Journey) -ps

जिंदगी एक सफर है सुहाना

जिंदगी एक सफर है सुहाना (Journey) -ps prkshsah2011.bogspot.in

जिंदगी एक सफर है सुहाना,

मिलजुल कर है अपनाना।

चलो सब साथ या अकेला,

बोझ अपना या दूसरे का, खुद पे इतना मत देना

कि खुद का ही वजूद भूल जाओ।

देखो अगल बगल कोई दोस्त है या दुश्मन,

ट्रेन के डिब्बें अच्छे हैं या टूटे-फूटे अस्त-व्यस्त,

चलो इसमें कोई फर्क ना करें,

हमसब एक ही परमात्मा के हैं जो बंदें ।

अलग अलग पट्रियों से हो कर

Friday, 16 December 2016

मेरा मन डगमगाता (Mera mann dagmagata) -PS


।। मेरा मन डगमगाता ।।
मेरा तन सहलता
हवा के झोंको से,
पताका डूलता हर दिशा में,
मेरा मन डगमगाता
हर मुश्किल दशा में ।