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Wednesday, 1 January 2020

आप सभी को नव वर्ष की ढ़ेर सारी शुभकामनएँ.......prakash sah

जश्न इस बार नई होगी  ( JASHN ISS BAAR NAYI HOGI ) - prakash sah - Unpredictable Angry Boy -  www.prkshsah2011.blogspot.com


।। जश्न इस बार नई होगी ।।

**(4)**

दुआ दे दूँ, दुआ माँग लूँ
   हाथ जोड़ कर सिर झुका लूँ...
खुद को मैं बड़ा बना लूँ,
खुद को मैं छोटा बना लूँ
जिससे ना कोई मायने बनेंगे,
जिससे ना कोई दायरें बनेंगे।
सबका सम्मान बराबर, सबका हो मान बराबर
तब बढेंगे, तन बढेंगे, मन बढेंगे,
जहाँ को हम जन्म लिए, वहीं से जुड़े सदैव रहेंगे।
हाँ...शीघ्रता में देर होगी,
सर्द की रूग्ण भोर होगी,
स्वर की अमर गूंज वही होगी,
इस नव वर्ष की पहली किरण के संग
नए लोग मिलेंगे पर रश्म नई होगी।
साल भी वही है, सरहदें भी वही है
पर जश्न इस बार नई होगी
   पर जश्न इस बार नई होगी...
   पर जश्न इस बार नई होगी...

पूरी रचना यहाँ जरूर पढ़े...👇👇


------------******------------

🙏🙏 धन्यवाद!! 🙏🙏


©prakashsah

UNPREDICTABLE ANGRY BOY
PRKSHSAH2011.BLOGSPOT.IN
P.C. : google

Saturday, 23 September 2017

बदलाव (TRANSITION : Badlaaw) -ps

“सच्च कहा है किसी ने की वक्त के साथ हर कोई बदल जाता है, 
गलती उसकी नही जो बदलता है, 
गलती उसकी होती है जो पहले जैसा रह जाता है”

मेरा मानना है...यह कथन कुछ या कहूँ कि बहुत हद तक सही नही है,
मेरा विचार कुछ भिन्न है : 

।। बदलाव ।।


माना किसी ने सच्च कहा है कि

बदलाव जिंदगी की एक रीत हो,

पर वो बदलाव ही किस काम की,

जिसमें साथी के साथ रहने का ही ना गीत हो ।



उस तूफान का ही क्या काम,

जिसमे हवा अपनी राह ना बदले ।

पर उस हवा को सलाम

जो धूल को भी अपनी बदलाव की

Friday, 15 September 2017

जिंदगी एक सफर है सुहाना (Zindagi ek safar hai suhana; Journey) -ps

जिंदगी एक सफर है सुहाना

जिंदगी एक सफर है सुहाना (Journey) -ps prkshsah2011.bogspot.in

जिंदगी एक सफर है सुहाना,

मिलजुल कर है अपनाना।

चलो सब साथ या अकेला,

बोझ अपना या दूसरे का, खुद पे इतना मत देना

कि खुद का ही वजूद भूल जाओ।

देखो अगल बगल कोई दोस्त है या दुश्मन,

ट्रेन के डिब्बें अच्छे हैं या टूटे-फूटे अस्त-व्यस्त,

चलो इसमें कोई फर्क ना करें,

हमसब एक ही परमात्मा के हैं जो बंदें ।

अलग अलग पट्रियों से हो कर

Wednesday, 30 August 2017

कम-से-कम मार्गदर्शक तो बना (Kam-se-Kam Maargdarshak to Bana) -ps

।। कम-से-कम मार्गदर्शक तो बना ।।

कम-से-कम मार्गदर्शक तो बना (maargdarshak) -ps prkshsah2011.blogspot.in

रात बित जाए कि दिन बित जाए,
फर्क ना पड़े कौन क्या कहे कि हम क्या रह गएं।
तु  भी तो कभी वही था, जो हम आज हैं,
‘राज’ राज रह गया जब हम दोनो चाह गएं।

किस ओर मैं बढ़ गया राह का न पता चला,
तुझे उस ओर देखा तो राह बदल डाला।
इतना तो पता चला जिस राह पे तु लगातार बढ़ा,
उस राह से मुझे मेरी मंजिल कभी सही ना मिला।

तु गलत था या सही था,
इसमें अब मैं समय बर्बाद नही करता।
तु मेरे जीवन का आदर्श नहीं तो
कम-से-कम मार्गदर्शक तो बना। 
©ps

Friday, 18 August 2017

दो चेहरें (TWO FACES) -ps

।। दो चेहरें ।।

जिंदगी की एक पहेली है
चेहरा ही जीवन की एक सहेली है ।
क्यूँ घूमते फिरते सब दो चेहरें में ?
अब बस यही एक नई मुश्किल पहेली है।

वास्तव मे होतें एक ही इंसान हैं,
बात करतें वही हैं,
पर दिखतें ‘दो राही’ हैं,
शायद इसी को कहते ‘दो चेहरें’ हैं।

चेहरे के बिना आईना का क्या हो !
आईना के बिना खूबसूरत चेहरों का क्या हो !
इन्ही चेहरों पर सभी का ‘चेहरा पे चेहरा’ है,
एक चेहरा पर किसी का ना दिल ठहरा है।

दो चेहरों की होती है उपयोगीता –
एक दिखाती है अगर उदासीनता,
तो दूसरी दिखाती है प्रसन्नता।

एक को सजाते-सँवारते है कोई अपनो के खातिर,
तो दूसरी को सजाते-बिगाड़ते है
अपने तरिके से जीने के खातिर ।

माना...अगर एक पे होता है क्रोध,
तो दूसरी पे आती है मोह ।
कुछ-कुछ समझ कर आता है होश,
फिर हम, एक दूसरे पे दिखाते है रोष ।
यही है मेरे दोस्त, दो चेहरों का दोष ।

समझ तो पूरी है...
पहेली का हल अब भी कुछ अधुरी है ।
क्यों सबको एक चेहरा में रहने से दूरी है ?
अब एक ही समझदारी है,
दूसरो को दे दूँ इस पहली को
इसमें ही शायद मेरी बहादुरी है
इसमें ही शायद मेरी बहादुरी है...
©ps

Tuesday, 15 August 2017

आज़ादी (Independence ) -ps

।। आज़ादी ।।

है आज़ादी ! है आज़ादी ! है आज़ादी !
कह दो ना
है आज़ादी ! है आज़ादी ! है आज़ादी !
जब सोच में कोई बंदिशे
तो कह दो क्या
है आज़ादी ? है आज़ादी ? है आज़ादी ?
जब हमसे कोई दूर हो तो क्या
है आज़ादी ? है आज़ादी ? है आज़ादी ?
जब मन में ना कोई गिले शिकवे हो तो
है आज़ादी ! है आज़ादी ! है आज़ादी !
साथ-साथ चलके आगे बढ़ना है तो
है आज़ादी ! है आज़ादी ! है आज़ादी !
देश में रहना है तो कहना है
वंदे मातरम् ! वंदे मातरम् ! वंदे मातरम् !
हाँ ! है यही, है यही, है यही
आज़ादी ! आज़ादी ! आज़ादी !
तो कह दो ना
है आज़ादी ! है आज़ादी ! है आज़ादी !
©ps


Monday, 24 July 2017

ढूँढ़ो जीवन प्यार का (Dhundhon Jeevan Pyaar Ka) -ps

 ।। ढूँढ़ो जीवन प्यार का ।। 



ढूँढ़ो जीवन प्यार का,
हवा, पानी, धूप सूत्रधार इस जीवन का ।
जितना चाहो उतना ले लो,
हर सुख मिलेगा इस संसार का ।

राह का इकरार करो
अनजाना-सा सफर का,
अंत नहीं अभी शुरूआत है,
मिलेगी मनचाही मंजिलें,
बस इंतजार है आत्मसात का ।

बढ़ते राह में भूल हुई,
अब क्या होगा उस कार्य का,
जिसके लिए मैनें दिन-रात लगाई ?
फिर से तुम आगे बढ़ो, बढ़ना तुम्हारा काम है,
सदैव उस भूल के याद में रहना नहीं,
वो कार्य है आत्ममंथन का ।
कारण है बस इतना –
“अंत का कोई छोर नहीं,
शुरूआत का कोई भोर नहीं"

जिंदगी नाम है उस सफ़र का,
जिस सफ़र के लिए तुम जिन्दा हो ।
तुम परिन्दा हो परिन्दा !
अपने सपनों के पंख फैलाया करो,
फिर देखो आसमां को कैसे छूते हो,
फिर देखो आसमां को कैसे छूते हो,
फिर देखो आसमां को कैसे छूते हो...
©ps


Thursday, 13 April 2017

दीर्घ निद्रा (Deep Sleep : Deergh Nidra) -PS

The whole world seems like someone is dreaming it everyday...

।। दीर्घ निद्रा ।।
ईश्वर हैं या नही, या फिर होतें विश्वास नामभर मात्र,
हम कठपुतलियाँ है या किसी स्वपन-रूपी चलचित्र का पात्र ।

स्वप्न-रूपी यह संसार ही है,
कोई लम्बे वक्त से सोया है दीर्घ निद्रा में,
स्वप्नो में ही कहानियाँ बुनता,
हम उसके भाँती-भाँती पात्र है ।

Sunday, 1 January 2017

जश्न इस बार नई होगी.......... -prakash sah

जश्न इस बार नई होगी  ( JASHN ISS BAAR NAYI HOGI ) - prakash sah - Unpredictable Angry Boy -  www.prkshsah2011.blogspot.com


।। जश्न इस बार नई होगी ।।


**(1)**

सरहदें तोड़ दूँ, सरहदें जोड़ दूँ
हर हद पार कर दूँ
जिससे बंदिशें बनती हैं,
जिससे मोहब्बतें बढ़ती हैं
काबु ना होगा, दिशा ना होगी
पर हिम्मत-ए-खुदा होगा,
जिससे बेपर्दा तो हम होंगे
पर दुनिया मायूसी की जश्न न मनाएगी।
पन्नें पलटते हैं, पलटते रहेंगे,
तारिखें भी वही होंगी पर गिनती बदल जाएगी,
साल भी वही है, सरहदें भी वही है
पर जश्न इस बार नई होगी
   पर जश्न इस बार नई होगी...
   पर जश्न इस बार नई होगी...


**(2)**

अमन से जी लूँ, अमन भी ला दूँ
  हर वो माहौल बना दूँ...
जिससे दूरियाँ बनती है,
जिससे नजदीकियाँ बढ़ती है।
हरा पान मुख में रंग भर दे,
ज़रा मान हर कोई को दे दे,
उल्लास-उत्साह संग आज मना ले,
कल कौन जाने!
कल कब हाथ की उंगलियाँ छूट जाएंगी?
साल भी वही है, सरहदें भी वही है
पर जश्न इस बार नई होगी
   पर जश्न इस बार नई होगी...
   पर जश्न इस बार नई होगी...


**(3)**


सजा मै दे दूँ, सजा मै ले लूँ,
न्याय की हर दरवाजा खटखटा दूँ...
जिसने भी जुर्म होते देखा है,
जिसने भी जुर्म किया है,
न्यायमूर्ती को खड़ा कर दूँ, संविधान पढ़ा दूँ,
कहीं छूट न जाए
कोई मासूम की न्याय की तड़पन की आग।
सपनें भी होंगे, ख्वाहिशें भी होंगी
ज़िद भी होगी, तड़पन भी वही होगी
पर इस पीढ़ी की उर्जा मे जोश नई होगी...
इंसानियत को बचाएँगे अपने अहम को हटा कर,
सहम-सहम कर, हिम्मत दिखा कर,
पुरानी वही पहचान होगी
पर वो इंसान की नई गाथा होगी।
साल भी वही है, सरहदें भी वही है
पर जश्न इस बार नई होगी
   पर जश्न इस बार नई होगी...
   पर जश्न इस बार नई होगी...


**(4)**


दुआ दे दूँ, दुआ माँग लूँ
   हाथ जोड़ कर सिर झुका लूँ...
खुद को मैं बड़ा बना लूँ,
खुद को मैं छोटा बना लूँ
जिससे ना कोई मायने बनेंगे,
जिससे ना कोई दायरें बनेंगे।
सबका सम्मान बराबर, सबका हो मान बराबर
तब बढेंगे, तन बढेंगे, मन बढेंगे,
जहाँ को हम जन्म लिए, वहीं से जुड़े सदैव रहेंगे। 
हाँ...शीघ्रता में देर होगी,
सर्द की रूग्ण भोर होगी,
स्वर की अमर गूंज वही होगी,
इस नव वर्ष की पहली किरण के संग
नए लोग मिलेंगे पर रश्म नई होगी।
साल भी वही है, सरहदें भी वही है
पर जश्न इस बार नई होगी
   पर जश्न इस बार नई होगी...
   पर जश्न इस बार नई होगी...
                           -prakash sah


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©prakashsah
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Friday, 16 December 2016

मेरा मन डगमगाता (Mera mann dagmagata) -PS


।। मेरा मन डगमगाता ।।
मेरा तन सहलता
हवा के झोंको से,
पताका डूलता हर दिशा में,
मेरा मन डगमगाता
हर मुश्किल दशा में ।