आप सभी का इस ब्लॉग पर स्वागत है। इस ब्लॉग को लिखने का कुछ खास उद्देश्य नहीं है। एक इंसान को अपने जीवन में हर दिन कई भाव विचारों से गुजरना पड़ता है। बस इन्हीं भावों को कविताओं के माध्यम से आपसब के साथ साझा करने का मुझे यह एक उचित स्थान लगा। आप मेरे लिखे रचनाओं के माध्यम से इस ब्लॉग के नाम का सार्थक परिभाषा भी जान सकते हैं। मेरी रचनाएँ कुछ काल्पनिक हैं और कुछ वास्तविक हैं। इससे किसी के जीवन में मार्गदर्शन मिल जाये तो बस यह एक संयोग मात्र होगा। [अंतिम पंक्ति आपके चेहरे पे मुस्कान लाने के लिए था]
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Friday, 14 April 2017
Monday, 5 December 2016
पूर्वांचल (Purvanchal) - P.S.
।।
पूर्वांचल ।।
जिसने पूर्वांचल की गोद मे खेला,
पग-पग
मे देखा आस्था का मेला ।
जिसने
खाई इस मिट्टी कीसौगंध,
पल-पल
महसूस की इसकी सुगंध ।
जिन
आत्माओं में जगी धर्मत्व की ज्ञान,
जन-जन
ने माना उन महात्माओं को अपनी शान ।
आत्मज्ञान का हुआ बोध,
इस भूमी पे अवतरीत हुए, ‘महात्मा बुध्द’ ।
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