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Tuesday, 8 October 2019

बाढ़ में बादल (Baadh Mein Badal) - prakash sah



बाढ़ में बादल

बाढ़ में बादल (Baadh Mein Badal) - Prakash sah - UNPREDICTABLE ANGRY BOY www.prkshsah2011.blogspot.in



बदइंतजामी से बेहाल है बादल

कहीं है जंगल फांका-फांका,

कहीं भूखंड है पड़ा विरान।

असमंजस में बादल, कहीं फूट पड़ा

जन जीवन हुआ इतर-बितर।

असमय व्यवहार इसका,

हदें तोड़ दी जरूरतों की।

उभर पड़ी विस्थापना की समस्या,

बादल ये देख-देख सोच में पड़ा-

मैं अप्राकृतिक हुआ कैसे?

दोष इसमें किसका है?

मेरा या मानवों के भौतिक सुख का?

- prakash sah (©ps)





***
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UNPREDICTABLE ANGRY BOY
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Friday, 23 August 2019

नदी के लिए आंदोलन क्यूँ ??







नदी की जलधारा निरंतर
अपने पूरे वेग में बहती है
जब, घने वनों के छाँव से
इनके चरणस्पर्श करके
आशीष में कुछ बूंदे लेकर
सागर से मिलने जाती है।

अनेक बाधाओं को
अपने कोमल बर्ताव से
आंचल में शामिल करके
मीठे मीठे अनुभव सहेजकर
सागर के 'खारा' ज़ख्म को
थोड़ा-सा कम करने जाती है।

जीवन जो आश्रित है
उनको अपना संतान मानकर
भू-माता अपने गर्भ में
'अमृत' को संभाले रखी है।
किनारे को सागर के चोट से
'खारा' दोष से मुक्त रखने के लिए
नदी निरंतर आंदोलन करती रहती है।
 -  ©ps प्रकाश साह


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Friday, 28 July 2017

बारीश के बूँदें (Barish ke Bundein : Rain) -ps

।। बारीश के बूँदें ।।

बारीश के बूँदों का दिवाना ये मौसम,
शीतलता फैलाना इसका रशम ।
छन-छन कर के बूँदो के घूँघरू,
बुलाते हमे की छुपा ले आँसु ।।

तेज हवाओं से बहतें हैं बादल,
ठहरतें हैं तभी, जब दिखतें हरे-भरे जंगल ।
ज्वलंत क्रोधों को दिखातें,
बरसाते अमृत के बूँदों के बारीश ।
अवरूध उत्पन्न करते हैं गीर,
काले छाती को चिर
दहाड़ते हुए, जलधारा बहाते हैं बादल ।।

बारीश के बूँदों का दिवाना ये मौसम,
बारीश के बूँदों का दिवाना ये मौसम...

मोतीयों के भाँती बारीश के बूँदें,
तन पे हैं गिरते, लगते ठंडे-ठंडे ।
छोड़ जाते हैं बूँदें, मिट्टी पे निशान,
धरती माता की गोद में पाते विराम ।।

बारीश के बूँदों का दिवाना ये मौसम,
बारीश के बूँदों का दिवाना ये मौसम...

काले बादलों से पंखों को सुसज्जीत माने,
मग्न-मुग्ध मयूर जाती नृत्य नहाने ।

मत्स्य जीवन नीर पे ही निर्भर,
उछलते-बिछलते भागतें इधर-उधर ।
एक-एक बूँदों की उपेछा पर
होतें मरन की ओर अग्रसर,
बचा लो अगर तो बन जाते समुद्र की लहर ।।

बारीश के बूँदों का दिवाना ये मौसम,
बारीश के बूँदों का दिवाना ये मौसम...

इस मौसम की गहराई बाहों मे समाई,
निंद की झूला पे बारीश के बूँदों ने सुलाई ।

बादल के काले-सफेद ही हैं रंग,
बरसते तो कर देते नभ निले रंग ।

बन कर बूँदे, गिरते हैं आँसु,
नयन के सपने की छू ले गगन ।

बारीश के बूँदों का दिवाना ये मौसम,


बारीश के बूँदों का दिवाना ये मौसम,
बारीश के बूँदों का दिवाना ये मौसम...
©ps