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Sunday, 11 August 2024

जंगल | PRAKASH SAH

 

PC : @prakashsah

किसी ने सोचा कि

मुझ जंगल को लूट लेने से

मैं खाली हो जाऊँगा।

हाँ, खाली हो जाऊँगा कई निराशाओं से।


शायद क़ाबिल नहीं रहा

उन्हें छाँव देने में।

शायद क़ाबिल नहीं रहा

उन्हें जीवन ऊर्जा देने में।

-प्रकाश साह
15062024




🙏🙏 धन्यवाद!! 🙏🙏

Saturday, 10 August 2024

शहर राज़दार | PRAKASH SAH

PC : @prakashsah

 


ज़हन  में  जब  कुछ राज़  दफन  किये जाएँगे,

तो सच में शहर में बहुत कोई अपने हो जाएँगे।


लगन से जब कुछ पौधें शहरी भाषा सीख जाएँगे,

तो सच में शहर में कई  बग़ीचे जंगल हो जाएँगे।


-प्रकाश साह
05042024



  

🙏🙏 धन्यवाद!! 🙏🙏

Tuesday, 1 September 2020

मुझसे सब नाराज़ हैं.....- PRAKASH SAH


क्या कहूँ!

कहने को

बहुत कुछ है-

मुझसे

सब नाराज़ हैं,

बस...

यही कहने को है।

 

एक-एक कर

सब दूर

हो रहें हैं

मुझसे।


उथल-पुथल

मच गया है

जीवन में।

 

इसकी

वजहें

बहुत है

बस...

समझ

नहीं आ रहा...


कि

कहाँ से

और कैसे

सुलझाउँ इसे?

 

कि

दिल की

सुनूँ या

दिमाग की?

 

एक अविश्वास

का पुल

बन गया है

मन में।

 

और

इस कदर

इस पर

बढ़ गया हूँ...

 

कि

दूरियाँ,

दिल और

दिमाग तक की

बस...

आधी रह गई है।

 

क्या कहूँ...

कहने को

बहुत कुछ है!

मुझसे

सब

नाराज़ हैं

बस...

यही कहने को है।

                      ©prakashsah


Tuesday, 9 June 2020

शून्य -prakash sah

शून्य (SHUNYA) - prakash sah - Unpredictable Angry Boy -  www.prkshsah2011.blogspot.com

शून्य की आकृति में

अनगिनत बिंदु का परिश्रम है।

कंकर-कंकर पथ पर

पाँव के छाले इसके मूल्य है।

शून्य ही समय है,

अनगिनत की गिनती में

शून्य ही, इसका मान है,

प्रमाण है।

शून्य को आकार दो,

कर्म के पराक्रम से,

अणु से ब्रह्माण्ड तक,

बिंदु से लकीर तक,

इंसान से फ़कीर तक

बनने के सफर में।

                    ©

pr
akashsah

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Saturday, 23 May 2020

मैं अभी थका नहीं - prakash sah

मैं अभी थका नहीं ( MAIN ABHI THAKA NAHI ) - prakash sah - Unpredictable Angry Boy -  www.prkshsah2011.blogspot.com


            (1)

मैं अभी थका नहीं

मैं अभी रूका नहीं

एक प्रण है मेरा

अंत मेरा गुमनाम ना हो

सोच के भँवर में

मन के अँधेरे में

मैं कभी फँसा नहीं

मैं कभी बुझा नहीं

 

हाँ...! मैं अभी थका नहीं

        मैं अभी रूका नहीं


            (2)

समय घड़ी की चलती है

बिना लिए अनुमति किसी की।

राज रजनी का ढूँढ़ना है

भोर-सा मुझे बनना है

बीती बात भूल जाना है

मैं अभी हारा नहीं

मैं अभी डरा नहीं

 

हाँ...! मैं अभी थका नहीं

        मैं अभी रूका नहीं

 

            (3)

सहनशील व्यवहार लाना है

नित्य सहज करम करना है

निज बातों का प्रबल समर्थक

स्वयं में इसका बीज बोना है

मैं अभी हम नहीं

हम अभी बनना है


मैं अभी थका नहीं

मैं अभी रूका नहीं...

 

हाँ...! मैं अभी थका नहीं

        मैं अभी रूका नहीं

                                                       -prakash sah



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Wednesday, 8 January 2020

बस इतना ही समझिए..........-prakash sah

बस इतना ही समझो (Bass Itna Hi Samjho) - prakash sah - Unpredictable Angry Boy -  www.prkshsah2011.blogspot.com


हिंसा का जवाब अहिंसा नहीं
अहिंसा का जवाब हिंसा नहीं
       पर हिंसा का जवाब...हिंसा भी नहीं
और अहिंसा का जवाब
अहिंसा भी गैरजरूरी नहीं।

ना आज तक कोई हिंसा रोक पाया है
ना फिर कोई दूसरा गाँधी बन पाएगा
       हर कोई गाँधी का...चोला पहनकर
अहिंसा का झंडा थामे रखा है
ये भी बेफिजूली है, वो भी नामंजूर है

जो हो गया वो भी सही है
और
जो ना हुआ वो भी गलत है

                 बस इतना ही समझिए...!!!!

                                                  -prakash sah




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Wednesday, 1 January 2020

आप सभी को नव वर्ष की ढ़ेर सारी शुभकामनएँ.......prakash sah

जश्न इस बार नई होगी  ( JASHN ISS BAAR NAYI HOGI ) - prakash sah - Unpredictable Angry Boy -  www.prkshsah2011.blogspot.com


।। जश्न इस बार नई होगी ।।

**(4)**

दुआ दे दूँ, दुआ माँग लूँ
   हाथ जोड़ कर सिर झुका लूँ...
खुद को मैं बड़ा बना लूँ,
खुद को मैं छोटा बना लूँ
जिससे ना कोई मायने बनेंगे,
जिससे ना कोई दायरें बनेंगे।
सबका सम्मान बराबर, सबका हो मान बराबर
तब बढेंगे, तन बढेंगे, मन बढेंगे,
जहाँ को हम जन्म लिए, वहीं से जुड़े सदैव रहेंगे।
हाँ...शीघ्रता में देर होगी,
सर्द की रूग्ण भोर होगी,
स्वर की अमर गूंज वही होगी,
इस नव वर्ष की पहली किरण के संग
नए लोग मिलेंगे पर रश्म नई होगी।
साल भी वही है, सरहदें भी वही है
पर जश्न इस बार नई होगी
   पर जश्न इस बार नई होगी...
   पर जश्न इस बार नई होगी...

पूरी रचना यहाँ जरूर पढ़े...👇👇


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🙏🙏 धन्यवाद!! 🙏🙏


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Wednesday, 18 December 2019

ये तुम्हारा समर नहीं, ‘अगर-मगर’ वाला भ्रम है.......prakash sah


#CAB ये अंग्रेजी के तीन अक्षरों को देखकर मुझे सबसे पहले इतना ही समझ आया कि जो पीड़ित हैं वो Cab लेकर भारत आ जाएं उनका ख़्याल भारत रखेगा। और जो घुसपैठिए हैं वो यही Cab लेकर वापस भारत से चले जाएं वर्ना भारतीय सरकार आपकी विदाई के लिए प्रोपर समारोह कर देगी।

हमसब जानते है कि अगर आपके पास ज्ञान अर्जित है तो आप सभी परेशानियों का हल स्वतः ढूँढ लेते हैं। पर मुझे बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारे देश के कुछ विश्वविद्यालयों के छात्र तात्कालिक विवाद (जो मुझे लगता है कि यह विवाद ही नहीं है) का समाधान नहींसिर्फ विरोध करना चाहते हैं। जिससे की देश में अराजकता की स्थिति बनी रहे। 
ये छात्र अभी राजनीति के कठपुतली मात्र हैं....जो संवाद करना नहीं जानते। ये भविष्य के भय को दिखाना चाह रहें...लेकिन वर्तमान के पीड़ित को नहीं देखना चाहते। ये छात्र उन षड्यंत्रकारी आत्माओं (राजनीतिज्ञ) के लिए शरीर का काम कर रहे हैं। और उन राजनीतिज्ञों को इस विरोध के दौरान इन छात्रों के हालात से भी मतलब नहीं है।

मुझे लग रहा है कि ये छात्र नहीं समझ पाएं कि किसी ख़ास समुदाय के हक के लिए उनका यह समर (युद्ध) नहीं है.....यह तो उन राजनीतिज्ञ द्वारा फैलाया गया अगर-मगर’ वाला भ्रम है। जो वे इस भ्रम के जाल में भ्रमित हो गये हैं।

आज की मेरी यह एक छोटी रचना उन छात्रों पर व्यंग्य है...जो भ्रमित हैं। मैंने इसमें उनकी तात्कालिक सोच को लिखा है...अपनी व्यंग्यात्मक विचार के साथ।


चलिए अब पढ़िए आज की मेरी रचना को....


ये तुम्हारा समर नहीं, ‘अगर-मगर’ वाला भ्रम है.......


ye tumhara samar nahi agar magar wala bhram hai - prakash sah - Unpredictable Angry Boy -  www.prkshsah2011.blogspot.com

                                 (1)
आँख मूँद ये विवाद देखो

संवाद नहींसिर्फ विरोध की आवाज़ सुनो।

पीड़ित को नहींप्रताड़ित होने का भय जानो

कानून लायक है या नहीं????? ये नहीं...

मेरी भीड़ देखो!!

भीड़ में सिर्फ छात्र हैं...,यही तुम मानो!

और कुछ नहीं

आँख मूँद ये विवाद देखो।


                                 (2)
शरीर है किसी और काआत्मा है किसी और का

कठपुतली बन गया ज्ञान...,अभी मत तू ये जान!!

चाहे बन जाए देश श्मशान।

ओ...ओह!! अल्हड़ है अभी तुम्हारा ज्ञान...

ये तुम्हारा समर नहीं, ‘अगर-मगर’ वाला भ्रम है।

©prakash sah


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©prakashsah
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MUNNA KUMAR
VIKASH KUMAR 
SHUBHAM SAH
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