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Sunday, 1 January 2017

जश्न इस बार नई होगी.......... -prakash sah

जश्न इस बार नई होगी  ( JASHN ISS BAAR NAYI HOGI ) - prakash sah - Unpredictable Angry Boy -  www.prkshsah2011.blogspot.com


।। जश्न इस बार नई होगी ।।


**(1)**

सरहदें तोड़ दूँ, सरहदें जोड़ दूँ
हर हद पार कर दूँ
जिससे बंदिशें बनती हैं,
जिससे मोहब्बतें बढ़ती हैं
काबु ना होगा, दिशा ना होगी
पर हिम्मत-ए-खुदा होगा,
जिससे बेपर्दा तो हम होंगे
पर दुनिया मायूसी की जश्न न मनाएगी।
पन्नें पलटते हैं, पलटते रहेंगे,
तारिखें भी वही होंगी पर गिनती बदल जाएगी,
साल भी वही है, सरहदें भी वही है
पर जश्न इस बार नई होगी
   पर जश्न इस बार नई होगी...
   पर जश्न इस बार नई होगी...


**(2)**

अमन से जी लूँ, अमन भी ला दूँ
  हर वो माहौल बना दूँ...
जिससे दूरियाँ बनती है,
जिससे नजदीकियाँ बढ़ती है।
हरा पान मुख में रंग भर दे,
ज़रा मान हर कोई को दे दे,
उल्लास-उत्साह संग आज मना ले,
कल कौन जाने!
कल कब हाथ की उंगलियाँ छूट जाएंगी?
साल भी वही है, सरहदें भी वही है
पर जश्न इस बार नई होगी
   पर जश्न इस बार नई होगी...
   पर जश्न इस बार नई होगी...


**(3)**


सजा मै दे दूँ, सजा मै ले लूँ,
न्याय की हर दरवाजा खटखटा दूँ...
जिसने भी जुर्म होते देखा है,
जिसने भी जुर्म किया है,
न्यायमूर्ती को खड़ा कर दूँ, संविधान पढ़ा दूँ,
कहीं छूट न जाए
कोई मासूम की न्याय की तड़पन की आग।
सपनें भी होंगे, ख्वाहिशें भी होंगी
ज़िद भी होगी, तड़पन भी वही होगी
पर इस पीढ़ी की उर्जा मे जोश नई होगी...
इंसानियत को बचाएँगे अपने अहम को हटा कर,
सहम-सहम कर, हिम्मत दिखा कर,
पुरानी वही पहचान होगी
पर वो इंसान की नई गाथा होगी।
साल भी वही है, सरहदें भी वही है
पर जश्न इस बार नई होगी
   पर जश्न इस बार नई होगी...
   पर जश्न इस बार नई होगी...


**(4)**


दुआ दे दूँ, दुआ माँग लूँ
   हाथ जोड़ कर सिर झुका लूँ...
खुद को मैं बड़ा बना लूँ,
खुद को मैं छोटा बना लूँ
जिससे ना कोई मायने बनेंगे,
जिससे ना कोई दायरें बनेंगे।
सबका सम्मान बराबर, सबका हो मान बराबर
तब बढेंगे, तन बढेंगे, मन बढेंगे,
जहाँ को हम जन्म लिए, वहीं से जुड़े सदैव रहेंगे। 
हाँ...शीघ्रता में देर होगी,
सर्द की रूग्ण भोर होगी,
स्वर की अमर गूंज वही होगी,
इस नव वर्ष की पहली किरण के संग
नए लोग मिलेंगे पर रश्म नई होगी।
साल भी वही है, सरहदें भी वही है
पर जश्न इस बार नई होगी
   पर जश्न इस बार नई होगी...
   पर जश्न इस बार नई होगी...
                           -prakash sah


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©prakashsah
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Saturday, 31 December 2016

सूरज की एक झलक (Suraj Ki Ek Jhalak) - PS



।। सूरज की एक झलक ।।


पेड़-पौधों की है ललक,


देख लूँ सूरज की एक झलक,


इंतजार की किरण जाने लगी,


आँखों की रौशनी खोने लगी,


अब हौले-हौले गिरने लगी आँखों की पलक ।






आपके कारण फूलों में है सुगंधित महक,


आपसे दूर जाने की है झिझक,


पेड़-पौधों की है ललक,


देख लूँ सूरज की एक झलक ।







जीवन जीने की आत्मीयता आप से ही,


खानापूर्ती आप से ही,


हर दुःख दर्द से निपटने की है कवच,


आपकी जिम्मेदारी पे है ना किसी को शक,


पेड़-पौधों की है ललक,


देख लूँ सूरज की एक झलक ।







धुल जाए मन की दूषित कलंक,


बारीश की एक बूँद गया टपक,


सुबह होने की आँखों मे है चमक,


आ चुका है प्रकाश का धमक,


सुन लो दुनिया वालों...


पेड़-पौधों की है ललक,


देख लूँ सूरज की एक झलक ।

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Sunday, 25 December 2016

अटल नाम है मेरा (MY NAME IS ATAL) -PS




।। अटल नाम है मेरा ।।
                                                                          -प्रकाश साह
बच्चों जन्मदिन है मेरा,
आज क्रिसमस का त्योहार है हम सबका,
मिठाई खाना जी भरकर,
मिठी-मिठी बातें करना हंसकर।
सच्चे बच्चों...
अटल नाम है मेरा ||

आत्मविश्वास है मेरा,
देश के भविष्य हो तुम,
भिन्न-भिन्न की कठिनाईयाँ मिलेगी,
हर कठिनाईयों में भी कमल खिला जाना तुम।
सच्चे बच्चों...
अटल नाम है मेरा ||


व्यक्तित्व है मेरा,
संविधान ही धर्म हुआ।
राजनीति नही,
जननीति को बनाना ही राजधर्म किया।
सच्चे बच्चों...
अटल नाम है मेरा ||

अपने संस्कृति को ना भूलना आप,
इसके आड़ में ना करना कोई पाप।
इसकी महत्वता को करना य़ाद,
अटल दृढ़ निश्चय रखना
सबको लेकर चलना है साथ।
सच्चे बच्चों...
अटल विश्वास हो तुम्हारा
अटल नाम है मेरा,
अटल नाम है मेरा,अटल नाम है मेरा...
                                      -Prakash sah



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Tuesday, 20 December 2016

SOMEONE | Prakash Sah


Someone believes me
to be a friend,
Many one  receive  my  relation
to the end.
But no one thinks
Why I’m so crazy for them?
As come like tears,
Blown like wind,
Have not the end like anything.