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Friday, 16 December 2016

मेरा मन डगमगाता (Mera mann dagmagata) -PS


।। मेरा मन डगमगाता ।।
मेरा तन सहलता
हवा के झोंको से,
पताका डूलता हर दिशा में,
मेरा मन डगमगाता
हर मुश्किल दशा में ।


Tuesday, 13 December 2016

LIFE MUST BE AT REST | Prakash Sah

LIFE MUST BE AT REST

Easy to chase
But hard to defense
Anything in the Life’s race

From left to right

Top to foot
Everyone is strong
from their root


Friday, 9 December 2016

नन्ही कली ( A Little Bud) - PS

।। नन्ही कली ।।

नन्ही कली निकली अभी
ओस की बूँदें उस पे पड़ी
थोड़ी सिहरी थोड़ी ठिठुरी
फिर शरमाते  हुए खिल उठी

नन्ही कली निकली अभी
कैसी ये दुनीया ? सोच रही
उसके अलावा कोई नही
थोडी अनजानी थोड़ी अकेली
आई चुलबुली हवा, हँस उठी

नन्ही कली को मिली सखी
हर पल रहती ये सनसनाती सखी
प्रेम की दीवानी नन्ही कली
कितनी कोमल इसकी पंखुड़ी
थोड़ी नखरीली थोड़ी मासूम
हो गई सयानी, चीख उठी

नन्ही कली अब नन्ही ना रही
अपनी पंखों-सी पंखुड़ी फैला रही
ये निखरती सुन्दरता सबको दिखी
रात के अंधेरों मे भी चमकती दिखी
थोड़ी झुकी थोड़ी ऐंठी
अब मै किसी को ना मिलूँ, कह उठी

नन्ही कली हुई ‘पुष्प रानी’
किसी को देखी किसी के हाथों मे
मेरी ही जैसी कोई ‘गुलाबी सयानी’
क्या कर रही वह ? उसे है जानना
थोड़ी उत्सुक थोड़ी उलझी
कहाँ हो मेरी सखी हवा ? पुछ उठी

Monday, 5 December 2016

पूर्वांचल (Purvanchal) - P.S.

पूर्वांचल

जिसने पूर्वांचल की गोद मे खेला,
पग-पग मे देखा आस्था का मेला ।

जिसने खाई इस मिट्टी कीसौगंध,
पल-पल महसूस की इसकी सुगंध ।

जिन आत्माओं में जगी धर्मत्व की ज्ञान,
जन-जन ने माना उन महात्माओं को अपनी शान ।

आत्मज्ञान का हुआ बोध,
इस भूमी पे अवतरीत हुए, ‘महात्मा बुध्द’ ।