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Thursday, 17 August 2017

किस कदम पे तुम चली हो (Kis Kadam Pe Tum Chali Ho) -ps

।। किस कदम पे तुम चली हो ।।

किस कदम पे तुम चली हो
देखें तो हम ज़रा
रात बित गई कि तुम कहाँ रूकी हो
देखें तो हम ज़रा
साथ छूट गया कि अब भी कुछ बचा है
देखें तो हम ज़रा
आसपास की मुश्किलें, घट रही या बढ़ रही है
देखें तो हम ज़रा
मन के मन के तारों में यादों की धमनियाँ
कि चल रही है या नही
देखें तो हम ज़रा
देखें तो हम ज़रा
देखें तो हम ज़रा
कि...
किस कदम पे तुम चली हो
किस कदम पे तुम चली हो
किस कदम पे तुम चली हो
देखें तो हम ज़रा
©ps

Tuesday, 15 August 2017

आज़ादी (Independence ) -ps

।। आज़ादी ।।

है आज़ादी ! है आज़ादी ! है आज़ादी !
कह दो ना
है आज़ादी ! है आज़ादी ! है आज़ादी !
जब सोच में कोई बंदिशे
तो कह दो क्या
है आज़ादी ? है आज़ादी ? है आज़ादी ?
जब हमसे कोई दूर हो तो क्या
है आज़ादी ? है आज़ादी ? है आज़ादी ?
जब मन में ना कोई गिले शिकवे हो तो
है आज़ादी ! है आज़ादी ! है आज़ादी !
साथ-साथ चलके आगे बढ़ना है तो
है आज़ादी ! है आज़ादी ! है आज़ादी !
देश में रहना है तो कहना है
वंदे मातरम् ! वंदे मातरम् ! वंदे मातरम् !
हाँ ! है यही, है यही, है यही
आज़ादी ! आज़ादी ! आज़ादी !
तो कह दो ना
है आज़ादी ! है आज़ादी ! है आज़ादी !
©ps


Sunday, 6 August 2017

मन करने को नशा (Mann Karne Ko Nasha : Alcoholic) -ps

 मन करने को नशा 
 मत करना ऐसा 


मन करने को नशा
मत करना ऐसा
लग जाएगा तुझको
इसका, चश्का, चश्का...
मन करने को नशा

मन करने को नशा
जब ना हो पैसा
कुछ ना करना वैसा
बज जाएगा तेरा
घण्टा, घण्टा...
मन करने को नशा

मन करने को नशा
मत लेना इसका
मजा, मजा...
रुदबा है ये ऐसा
जिसको देखो उसको
लेता रहता
वोडका, वोडका...
मन करने को नशा
मन करने को नशा
मन करने को नशा
मत करना ऐसा
©ps

Saturday, 29 July 2017

माटी के कर्ज चुकावे के जात बानी | भोजपुरी कविता | PRAKASH SAH

 ।। माटी के कर्ज चुकावे के जात बानी ।। 

'भोजपुरी' आपन भाषा

जनम जाहाँ लेनी, ओकरा के कहिया देखेम,
दू दिन रहेनी, तीन दिन रहेनी
फेर लउट के, इहे शहर में आ जानी ।
जेकर तनिसा लोग ही हमरा के जानलन
अाउर एही से हम, ई शहर के भी ठीक से ना पहचननी ।

जेकर कर्ज बा, ओकरा के ना चुका के
दोसरा के चुकावत बानी,
अब ढ़ेर हो गईल, अब ना होई ई हमरा से ।
जौन माटी में हम जनम ले ले बानी,
अब उहे माटी के कर्ज चुकावे के जात बानी ।