Email Subscription

Enter your E-mail to get
👇👇👇Notication of New Post👇👇👇

Delivered by FeedBurner

Followers

Wednesday, 15 November 2017

चुनावी मौसम (Election Time) -ps

चुनावी मौसम



चुनाव का मौसम,
मतदान एक रश्म ।
18 से ऊपर के मतदाता,
आते चुनने अपना राष्ट्रनिर्माता ।
कर्तव्य निर्वहन
करते सब अपना अपना,
सबको प्यारा देश अपना ।
सपना किसका पूरा करते नेता,
यूँ ही चलता
पता नहीं किसको कितना हक मिलता ।
जो जीता वही सिकंदर,
वही सांसद होते संसद के अंदर ।
चुनते वे एक नेता होतें वह प्रधानमंत्री,
इनके ही इर्द-गिर्द होतें भिन्न-भिन्न मंत्री-संत्री ।

पाँच साल का काल
साल-दर-साल
नेता हुएं मालामाल ।
ऐसे ही चला
क्रम-दर-क्रम हर सरकार
जनता हुई बेहाल ।
कौन है इसका जिम्मेदार
हम या सरकार ?

जागरूक कौन होगा ?
एक कार्य पूर्ण कर

Friday, 10 November 2017

देर रात अंधियारे में (Der Raat Andhiyare mein : Late Night) -ps

।। देर रात अंधियारे में ।।

Nightingale

तु क्यूँ चहकती रात के अंधियारे में,

क्यूँ तेरे पेट का मिलाप नही हुआ स्वादिष्ट आहारों से !

तुझे नही दीखता अब मैं सो गया, गहरी निंदों में,

तु पहले क्यूँ नही आयी, जा अब मै ना निकलूँ, इस गर्म रजाई से ।

मेरी एक लालसा तु समय पर आया कर, जिससे डूब जाऊँ तेरी स्वरगूँजन में ।

तु बार-बार क्यूँ भूल जाती, मै आलसी हूँ लड़कपन से ।

तेरी ये चहचहाहट सुनने के लिए ही जगता, देर तक इस अंधियारे में,

Saturday, 23 September 2017

बदलाव (TRANSITION : Badlaaw) -ps

“सच्च कहा है किसी ने की वक्त के साथ हर कोई बदल जाता है, 
गलती उसकी नही जो बदलता है, 
गलती उसकी होती है जो पहले जैसा रह जाता है”

मेरा मानना है...यह कथन कुछ या कहूँ कि बहुत हद तक सही नही है,
मेरा विचार कुछ भिन्न है : 

।। बदलाव ।।


माना किसी ने सच्च कहा है कि

बदलाव जिंदगी की एक रीत हो,

पर वो बदलाव ही किस काम की,

जिसमें साथी के साथ रहने का ही ना गीत हो ।



उस तूफान का ही क्या काम,

जिसमे हवा अपनी राह ना बदले ।

पर उस हवा को सलाम

जो धूल को भी अपनी बदलाव की

Friday, 15 September 2017

जिंदगी एक सफर है सुहाना (Zindagi ek safar hai suhana; Journey) -ps

जिंदगी एक सफर है सुहाना

जिंदगी एक सफर है सुहाना (Journey) -ps prkshsah2011.bogspot.in

जिंदगी एक सफर है सुहाना,

मिलजुल कर है अपनाना।

चलो सब साथ या अकेला,

बोझ अपना या दूसरे का, खुद पे इतना मत देना

कि खुद का ही वजूद भूल जाओ।

देखो अगल बगल कोई दोस्त है या दुश्मन,

ट्रेन के डिब्बें अच्छे हैं या टूटे-फूटे अस्त-व्यस्त,

चलो इसमें कोई फर्क ना करें,

हमसब एक ही परमात्मा के हैं जो बंदें ।

अलग अलग पट्रियों से हो कर