आप सभी का इस ब्लॉग पर स्वागत है। इस ब्लॉग को लिखने का कुछ खास उद्देश्य नहीं है। एक इंसान को अपने जीवन में हर दिन कई भाव विचारों से गुजरना पड़ता है। बस इन्हीं भावों को कविताओं के माध्यम से आपसब के साथ साझा करने का मुझे यह एक उचित स्थान लगा। आप मेरे लिखे रचनाओं के माध्यम से इस ब्लॉग के नाम का सार्थक परिभाषा भी जान सकते हैं। मेरी रचनाएँ कुछ काल्पनिक हैं और कुछ वास्तविक हैं। इससे किसी के जीवन में मार्गदर्शन मिल जाये तो बस यह एक संयोग मात्र होगा। [अंतिम पंक्ति आपके चेहरे पे मुस्कान लाने के लिए था]
Saturday, 3 June 2017
Thursday, 1 June 2017
नन्हे बालक की अल्हड़ बातें - prakash sah
खूबसूरत वादियों के गोद में
एक बालक
स्वप्न जिकर उठा एक बालक,
धिरे-धिरे छँटी ये रात की काली चादर,
उभरा एक
अनजाना-सा दृश्य,
अब ये सामने
कौन-सी विशाल चादर?
छँटने के बजाए बढ़ रही सवेर के अंजोर में,
चार पहर के अलावा,अब आया कौन-सा ये नया पहर?

चार पहर के अलावा,अब आया कौन-सा ये नया पहर?
बड़ी आँखों से कुछ क्षण तक यूँ ही देखा,
बनकर निकला
एक खूबसूरत वादियों में का पहाड़,
दाएँ जंगल, बाएँ जंगल, अडिग पहाड़ पे चढ़ता जंगल,
इन मनमोहक दृश्यों को समेटकर, बालक का मन हुआ चंचल।
फिर से एकटक, विशाल पहाड़ को बालक ने देखा,
फिर से एकटक, विशाल पहाड़ को बालक ने देखा,
मन में कुछ सवाल उभरा-
Monday, 8 May 2017
मधुर स्वर (MELODIOUS VOICE) -PS
In the memory of our Gurudev Rabindranath Tagoreji on his birh anniversary (7 May).
This Poem of mine is only dedicated to him.
उनकी अनेकों खूबसूरत रचनाएँ है पर मेरी उन्हीं से उनके लिए एक छोटी रचना
![]() |
| Rabindranath Tagore (7/5/1861 - 7/8/1941) |
।।
मधुर स्वर ।।
मधुर स्वर कान से दिल में आई,
रुधिरनस से पुरे देह में समाई ।
रच-बस रही, मन में खो रही
प्रकृति के गोद में जैसे मन झूल रही ।
लययुक्त धीमी–धीमी मुखवचन बुलाती,
चेतना को पुरे विश्व भ्रमन करा रही ।
ना कोई सवाल–ना कोई जवाब किसी से
बस यूँ ही गीत-संगीत सुनाती जा रही ।
Friday, 21 April 2017
चिड़िया (THE BIRD) -PS
।। चिड़िया ।।
पंख जो फैलाती, अंबर को छूती
उड़कर ही उड़कर, आती है मुझपर
उड़कर ही जाती, उड़कर ही आती
थकती नही, बस प्यासी है चिड़िया
सरोवर है सूखा, नदी मिली तड़पती
बरसा बरसती नही, चिड़िया जाए कहाँ !
चिड़िया है चुगती, चुगती है दाना
कहती है, पानी तुम देने आना
कहती है, पानी तुम देने आना
कहती है, पानी तुम देने आना
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