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Monday, 12 August 2024

उम्र से पहले | PRAKASH SAH

 

PC : @prakashsah


मुमकिन नहीं तुम्हारा मेरा होना,

यूँ ही उम्र को पहले मैंने बुलाया नहीं।


सच है कि यूँ ही कोई

'उम्र' को पहले बुलाया नहीं करता,

बेवक्त घर में उन्हें अचानक

छोटा से बड़ा होना जाना पड़ता होगा।

-प्रकाश साह
29062024



 कुछ अन्य नयी रचनाएँ....



🙏🙏 धन्यवाद!! 🙏🙏

Sunday, 11 August 2024

जंगल | PRAKASH SAH

 

PC : @prakashsah

किसी ने सोचा कि

मुझ जंगल को लूट लेने से

मैं खाली हो जाऊँगा।

हाँ, खाली हो जाऊँगा कई निराशाओं से।


शायद क़ाबिल नहीं रहा

उन्हें छाँव देने में।

शायद क़ाबिल नहीं रहा

उन्हें जीवन ऊर्जा देने में।

-प्रकाश साह
15062024




🙏🙏 धन्यवाद!! 🙏🙏

Saturday, 10 August 2024

शहर राज़दार | PRAKASH SAH

PC : @prakashsah

 


ज़हन  में  जब  कुछ राज़  दफन  किये जाएँगे,

तो सच में शहर में बहुत कोई अपने हो जाएँगे।


लगन से जब कुछ पौधें शहरी भाषा सीख जाएँगे,

तो सच में शहर में कई  बग़ीचे जंगल हो जाएँगे।


-प्रकाश साह
05042024



  

🙏🙏 धन्यवाद!! 🙏🙏

Friday, 9 August 2024

उज्जर मन | Prakash Sah | भोजपुरी कविता

 



जेंगऽ खेतिया में लहलाहे ला, लागल फसल,

ओहिंगऽ करऽ ता मन उज्जर के हरिअर करे के।



हवा बन के आईल बा केहू बरखा के,

पर नईखे आईल केहू बन के बदरी सावन के।



जे के मन चाहे ला, उ कहाँ मिलेला!

अब मिलेला खाली बरखा बेमौसम के।



जब गरजेला बादल कौनो बेरा पहरिया में,

तऽ समझऽ फाटल बा मन कहीं केहू के।



ई काहे हो ला?

ए से पहिले ठीक करे के होई आपन उज्जर मन के।

-प्रकाश साह
22062024


 

शब्दार्थ :

जेंगऽ : जिस तरह से;   ●ओहिंगऽ : उस तरह से; ●उज्जर : सफेद;  ●हरिअर : हरा रंग, हरियाली; ●बेरा : समय;  ●पहरिया : पहर




आपकाे यह रचना कैसी लगी नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बतायें। और अगर मेरे लिए आपके पास कुछ सुझाव हाे तो आप उसे मेरे साथ जरूर साझा करें।     

🙏🙏 धन्यवाद!! 🙏🙏