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Tuesday, 1 September 2020

मुझसे सब नाराज़ हैं.....- PRAKASH SAH


क्या कहूँ!

कहने को

बहुत कुछ है-

मुझसे

सब नाराज़ हैं,

बस...

यही कहने को है।

 

एक-एक कर

सब दूर

हो रहें हैं

मुझसे।


उथल-पुथल

मच गया है

जीवन में।

 

इसकी

वजहें

बहुत है

बस...

समझ

नहीं आ रहा...


कि

कहाँ से

और कैसे

सुलझाउँ इसे?

 

कि

दिल की

सुनूँ या

दिमाग की?

 

एक अविश्वास

का पुल

बन गया है

मन में।

 

और

इस कदर

इस पर

बढ़ गया हूँ...

 

कि

दूरियाँ,

दिल और

दिमाग तक की

बस...

आधी रह गई है।

 

क्या कहूँ...

कहने को

बहुत कुछ है!

मुझसे

सब

नाराज़ हैं

बस...

यही कहने को है।

                      ©prakashsah


Tuesday, 9 June 2020

शून्य -prakash sah

शून्य (SHUNYA) - prakash sah - Unpredictable Angry Boy -  www.prkshsah2011.blogspot.com

शून्य की आकृति में

अनगिनत बिंदु का परिश्रम है।

कंकर-कंकर पथ पर

पाँव के छाले इसके मूल्य है।

शून्य ही समय है,

अनगिनत की गिनती में

शून्य ही, इसका मान है,

प्रमाण है।

शून्य को आकार दो,

कर्म के पराक्रम से,

अणु से ब्रह्माण्ड तक,

बिंदु से लकीर तक,

इंसान से फ़कीर तक

बनने के सफर में।

                    ©

pr
akashsah

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©prakashsah
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Saturday, 23 May 2020

मैं अभी थका नहीं - prakash sah

मैं अभी थका नहीं ( MAIN ABHI THAKA NAHI ) - prakash sah - Unpredictable Angry Boy -  www.prkshsah2011.blogspot.com


            (1)

मैं अभी थका नहीं

मैं अभी रूका नहीं

एक प्रण है मेरा

अंत मेरा गुमनाम ना हो

सोच के भँवर में

मन के अँधेरे में

मैं कभी फँसा नहीं

मैं कभी बुझा नहीं

 

हाँ...! मैं अभी थका नहीं

        मैं अभी रूका नहीं


            (2)

समय घड़ी की चलती है

बिना लिए अनुमति किसी की।

राज रजनी का ढूँढ़ना है

भोर-सा मुझे बनना है

बीती बात भूल जाना है

मैं अभी हारा नहीं

मैं अभी डरा नहीं

 

हाँ...! मैं अभी थका नहीं

        मैं अभी रूका नहीं

 

            (3)

सहनशील व्यवहार लाना है

नित्य सहज करम करना है

निज बातों का प्रबल समर्थक

स्वयं में इसका बीज बोना है

मैं अभी हम नहीं

हम अभी बनना है


मैं अभी थका नहीं

मैं अभी रूका नहीं...

 

हाँ...! मैं अभी थका नहीं

        मैं अभी रूका नहीं

                                                       -prakash sah



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Thursday, 23 January 2020

भोजपुरी के भूल गई लऽ | PRAKASH SAH

..........                     

भोजपुरी के भूल गई लऽ
तऽ फिर माई के दुलरूवा कईसन!

आजही के दिन छोड़ गई लऽ
तऽ फिर माई के आंचरवा कईसन!

आपन सपना के पावे गई लऽ
तऽ फिर चैन के निनिया कईसन!

आपन रूप के भूल के
दोसरा के रूप ले ले लऽ
और लौटे के अइलऽ ना
तऽ खाली सोचला के फायदा कईसन!

                                                           -prakash sah

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